भारत से पहली लंबी विदेश यात्रा के लिए जापान अच्छा विकल्प है: ट्रांसपोर्ट तेज़ और भरोसेमंद है, शहरों में रात को भी पैदल चलना सुरक्षित है, और आधुनिक महानगर तथा पारंपरिक जापान एक-दूसरे से कुछ ही घंटे दूर हैं।
जापान की यात्रा असल में कैसी होती है
पहली बार जाने वाले ज़्यादातर लोग टोक्यो–क्योतो–ओसाका के रास्ते पर चलते हैं। तीनों शहर
एक ही बुलेट ट्रेन लाइन पर हैं, इसलिए बिना घरेलू उड़ान और बिना लंबे सफ़र वाले दिनों के
तीनों देखे जा सकते हैं। आठ दिन इनके लिए काफ़ी हैं; ग्यारह दिन में हाकोने, नारा या एक
खाली दिन बिना भागदौड़ के जोड़ा जा सकता है।
कब जाएँ
मार्च के आख़िर से अप्रैल की शुरुआत चेरी ब्लॉसम का मौसम है — साल का सबसे ख़ूबसूरत
और सबसे महँगा समय। अक्टूबर और नवंबर में पतझड़ के रंग, चलने-फिरने लायक मौसम और
साफ़ तौर पर कम क़ीमतें मिलती हैं। जून बारिश का मौसम है और ज़्यादातर यात्रियों को
इससे बचना चाहिए।
ख़र्च कितना आता है
ग्रुप डिपार्चर के लिए प्रति व्यक्ति क़रीब ₹1.4 से ₹1.9 लाख, इंटरनेशनल फ़्लाइट छोड़कर —
यह अवधि और मौसम पर निर्भर करता है। जापान सस्ता देश नहीं है, पर ख़र्च अंदाज़े में रहता
है: ट्रेनें समय पर चलती हैं, होटल वही देते हैं जो बताते हैं, और अचानक जुड़ने वाले
ख़र्चों की गुंजाइश कम है।
शाकाहारी खाने का क्या
भारतीय यात्री यही सबसे ज़्यादा पूछते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के मुक़ाबले जापान में
शुद्ध शाकाहारी खाना ढूँढना सचमुच मुश्किल है, क्योंकि दाशी — मछली से बना स्टॉक — कई
ऐसे व्यंजनों में होता है जो देखने में शाकाहारी लगते हैं। थोड़ी तैयारी से यह सँभल जाता
है: इसीलिए हमारे जापान डिपार्चर में रोज़ का इंडियन डिनर शामिल रहता है।